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मछली का झोल और प्रशंसा के दो बोल

किसी इन्सान की बुराईयों या कमियों में अच्छाई या गुण देखना भी अपने आप में एक अनूठा गुण है। मैंने पापा को देखा छोटी-छोटी बातों में प्रोत्साहन देते हुए, बड़ी _बड़ी गल्तियों को क्षमा करते हुए; साधारण सी कविता का गुणगान करते हुए, मामूली से चित्र की आड़ी तिरछी लकीरों की बेवजह ही सराहना करते हुए। अच्छा लगता है, कुछ करने का, कर दिखाने का ख्वाब सच्चा लगता है।

Waiting for Rampal: A Leaf from the Past

Sitting in a coffee house, waiting for a business client, I was finding it difficult to stay calm. I was forced to meditate on the nature of 'wait' and how 'waiting' impacts the human mind. As I kept ruminating, my thoughts unconsciously led me to the time when I was still a young child. I traversed back in time, dived into my past and became completely oblivious of my present 'wait'.