प्लेटफार्म पर इंतज़ार 

माथे पर नहीं थी कोइ शिकंज, ना मुख पर उलझन, कदम तेज़ थे, जोश अनोखा, आँखों में चमक नई थी, चहक रही वो जैसे मन ही मन, कुछ सपने बुनती डोल रही थी। आई सवारी, तब उठा समान बिन बोले ही बोल रही थी । झटपट द्वार किए बन्द,  स्काईबैग को तब रोशन ने उठाया, … Continue reading प्लेटफार्म पर इंतज़ार